कुछ तो है खाली सा............




 जहाँ जाना हो चला जाता हूँ

कब लोटुंगा किसी को नही बताता


देर रात तक जागता हूँ

सुबह भी कोई जल्दी नही उठाता


जो खाना है खा लेता हूं

उसमें नुकसान क्या है  कोई नही गिनाता


भाई चारा अपना अच्छा है

घर वालो को मुझसे कोई शिकायत नही है


कमाता हूं

 किसी पर निर्भर नही हूँ

यकीनन में खुश बहुत हूँ


पर कुछ तो हैं खाली सा

ये न अकेलापन है 

न कोई उदासी

 न घर की और न  किसी की याद

पर कुछ तो हैं खाली सा..................!

Writer ->sury (#retikaravi)

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